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कितने दिन बिट गये तेरि आँखो से पिकर सोचत हु देखु फिर से ओ जिंदगी जिकर नजरो को टेरी मेरि नजरो से चुम्ना नशे मे मेरे दिल का झुम्ना पिकर इतनि हम कहा जाते थे तेरि गलियोमे फिर चले आते थे सोचते थे जालिम फिर से पीला दे नजरो को अपनि मेरी नजरो से मिला दे नशे मे थे हम और जमाना था नशा तेरि हार अदा मे हमे नजर आता था नशा नशे को आज मे और बडाना चाहता हु तुज़े ...अधिक वाचा... 

कविता
kirtiraj द्वारे जुलै 23, 2010 3:55:00 PM IST वर पोस्टेड